जशपुर/एकादशी करम पूजा के दिन महिलाएं और बालिकाएं व्रत रखती हैं और 9 दिन पूर्व गणेश चतुर्थी के दिन विभिन्न प्रकार के अन्न जैसे धान,गेहूं, कूरथी, मक्का आदि को एक बर्तन में बालू और मिट्ठी रख कर हल्दी पानी छींट पवित्र कर उने एकादशी तक से सेवा उगाया जाता है ।
एकादशी के दिन करम डाल को करम देवता के रूप में स्थापित कर पूरे विधि विधान और श्रद्धा भाव से पूजा पाठ किया जाता है ।
व्रती इस दिन अपने भाइयों के सुख – समृद्धि, दीर्घायु और यशस्वी जीवनी के प्रार्थना करती है।
दूसरी मान्यता ये भी है कि बालिकाएं अच्छे जीवन साथी और सौभाग्यवती के लिए व्रत रखकर करम देवता को पूजा करती हैं।
विदित हो कि रौतिया समाज प्रकृति पूजक जनजातीय समाज है और तीज करम,बांबा करम,एकादशी करम,जितिया करम ,पानी करम, दशयं करम (दशहरा), सोहराई करम (दीपावली) भी बड़ी धूमधाम और उत्साहपूर्वक पीढ़ी दर पीढ़ी से मनाते आ रहा है।
